बदलते हुए समाज और परिस्थितियों के अनुसार हम बहुत बदले हैं। इस प्रकार के रीति-रिवाज समाज में मौजूद किसी भी प्रकार की बराबरी के अधिकार को नुकसान पहुंचाते हैं।
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