मनोविश्लेषकों का कहना कि इस तरह के लोग दूसरों को प्रभावित करने के आशय से अपने और अपने काम, अपनी उपलब्धियों के बारे में इस प्रकार झूठी बातें बढ़ा-चढ़ा कर बताते हैं कि बाद में वे खुद ही उन बातों पर विश्वास करने लगते हैं।
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