आखिर में जब पारिवारिक रिश्तों की भावनाओं और मां-बाप के अज्ञात डर की वजह से वह अपनी ख्वाहिश के इतर विषय चुनने को मजबूर हो जाता है, बुझे मन से समूचा सत्र कक्षाओं में जाता है।
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