अपने लिए मिट्टी का एक दीया कभी जला कर तो देखा जाए! इसके बाद ही पता चलता है कि अपने रिश्तों, अपनी मिट्टी और अपने आसमान की पहचान कैसी होती है। इसी में है मां-पिता, घर-गांव और कच्ची पगडंडियों की महक और शेष बची हुई रोशनी की कातर पहचान।
from Jansattaदुनिया मेरे आगे – Jansatta https://ift.tt/2Ndr51w
from Jansattaदुनिया मेरे आगे – Jansatta https://ift.tt/2Ndr51w
Comments
Post a Comment