बचपन में सुना था पिता से कि ‘नेकी कर दरिया में डाल’। इसमें ‘नेकी कर’’ तो समझ में आ गई, मगर ‘दरिया में डाल’, मेरी बाल सुलभ बुद्धि अनुभूत नहीं कर सकी थी।
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