मेरे एक मित्र जब सेवानिवृत्त हुए तो उन्हें लगा कि अब जीवन में कुछ खास करने को नहीं रहा। वे निराशा के भंवर में डूबने-उतराने लगे। घर पर ही रहते। धीरे-धीरे वे अपने पुराने मित्रों से भी कटने लगे। यहां तक कि घर के सदस्यों के साथ भी घुलना- मिलना कम कर दिया। नतीजतन वे अवसाद में जाने लगे। आखिर वही हुआ, जिसकी आशंका थी।
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