गुलमोहर हर वक्त दिलदार है। देने में कृपणता उसमें छटांक भी नहीं है। जब भी कोई याचक आता है तो वह देता है पूरे दिल से और वसूलने में संकोच रख कर वह जानता है कि खूबसूरती छीनने-झपटने में नहीं है। एक सादगी पसंद तपस्वी होता है, मगर उतना महान नहीं। उसकी बनिस्पत उस त्यागी में अपूर्व ऊर्जा होती है जो अपनी तमाम दौलत जरूरतमंदों में बांट देता है।
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