Skip to main content

BJP राजनाथ सिंह को देना चाहती थी ऐसी जिम्मेदारी, कर दिया था इनकार तब अमित शाह को लेना पड़ा था फैसला

उत्तर प्रदेश में आगामी विधानसभा चुनाव के लिए सभी पार्टियों ने तैयारियां शुरू कर दी है। अभी सूबे में बीजेपी की सरकार है और योगी आदित्यनाथ मुख्यमंत्री हैं। ऐसे में पिछले चुनाव की चर्चा होना भी आम बात है। साल 2017 के चुनाव में बीजेपी को पूर्ण बहुमत मिला था। साथ ही पार्टी ने बिना किसी मुख्यमंत्री के चेहरे के चुनाव लड़ा था। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के चेहरे पर चुनाव लड़ने से पहले तत्कालीन बीजेपी अध्यक्ष अमित शाह ने राजनाथ सिंह से संपर्क किया था।

अमित शाह की शानदार रणनीति की बदौलत सूबे में बीजेपी को साल 2014 में 80 में से 71 सीटों पर जीत हासिल हुई थी। अब अमित शाह चाहते थे कि राजनाथ सिंह आगे आएं और पार्टी का चेहरा बनें, लेकिन राजनाथ इसके लिए तैयार नहीं थे। इंडिया टुडे की रिपोर्ट के मुताबिक, राजनाथ तब केंद्रीय गृह मंत्री थे। लेकिन उन्हें ऐसा लग रहा था कि गृह मंत्री बनाकर उन्हें पहले ही दरकिनार कर दिया गया है। अब यूपी भेजकर उनकी राजनीति खत्म कर दी जाएगी।

साल 2016 में एक इंटरव्यू के दौरान अमित शाह से यूपी के सीएम के चेहरे के बारे में पूछा गया था तो उन्होंने साफ कहा था कि अभी कोई चेहरा नहीं होगा। सिर्फ मोदी ही पार्टी का चेहरा रहेंगे। राजनाथ के मना करने के बाद अमित शाह ने नरेंद्र मोदी के चेहरे को ही आगे करने का फैसला किया जबकि पार्टी को इसी दौरान बिहार और दिल्ली में करारी हार का सामना करना पड़ा था। ज्यादातर चैनल्स के सर्वे में भी यही कहा जा रहा था कि यूपी में बसपा या सपा की ही सरकार बनेगी।

मनोज सिन्हा के नाम पर चर्चा: यूपी में चुनाव के नतीजे आए तो सभी बड़े नेता हैरान रह गए क्योंकि इससे पहले पार्टी को कभी इतनी बड़ी जीत हासिल नहीं हुई थी। बाद में मुख्यमंत्री के लिए बीजेपी के दिग्गज नेता मनोज सिन्हा का नाम सामने आया। लेकिन पार्टी इसमें जल्दबाजी करने के मूड में नहीं थी।

सर्वे कराया गया और सबसे लोकप्रिय चेहरा निकलकर सामने आया योगी आदित्यनाथ का। योगी तब गोरखपुर से बीजेपी सांसद थे और वह मुख्यमंत्री बनने के नाम पर जवाब देने से बचते थे। आखिरकार आलाकमान ने योगी के नाम पर मुहर लगा थी और उन्हें दिल्ली से लखनऊ भेज दिया गया।

The post BJP राजनाथ सिंह को देना चाहती थी ऐसी जिम्मेदारी, कर दिया था इनकार तब अमित शाह को लेना पड़ा था फैसला appeared first on Jansatta.



from जीवन-शैली – Jansatta https://ift.tt/2WzKPoc

Comments

Popular posts from this blog

Redmi भारत में ला रही है अपनी पहली टीवी, 17 मार्च को होगी लॉन्च

Redmi भारत में अपनी पहली टीवी लॉन्च करने जा रही है, जिसको लेकर कंपनी ने ट्विवटर पर एक ट्वीट करके जानकारी दी है। शाओमी अभी तक भारतीय बाजार में एमआई के टीवी लॉन्च करती रही है। from Jansattaटेक्नोलॉजी – Jansatta https://ift.tt/3kTD1WB

Airtel 398 vs Vi 399 Plan: बेनिफिट्स में है बड़ा अंतर, कीमत में है सिर्फ 1 रुपये का फर्क, जानें कौन सा प्लान है बेस्ट

Airtel Prepaid Plan vs Vi Prepaid Plan: हम आज आपको इस बात की जानकारी देंगे कि Airtel 398 Plan और Vi 399 Plan के बीच कीमत के अलावा बेनिफिट्स में क्या-क्या अंतर है। from Jansattaटेक्नोलॉजी – Jansatta https://ift.tt/39NTnw8

बवासीर और फिस्टुला में अंतर कैसे करें? आचार्य बालकृष्ण से जानिए पाइल्स के रामबाण इलाज

बवासीर में ज्यादा खून बहने से शरीर में खून की कमी हो सकती है। व्यक्ति कमजोर महसूस करने लगता है। लंबे समय तक इस बीमारी के बने रहने और इलाज के अभाव में यह कोलोरेक्टल कैंसर का कारण भी बन सकता है। इसलिए लक्षण दिखते ही बवासीर का इलाज कराएं। आइए आचार्य बालकृष्ण से घरेलू उपचार के साथ बवासीर और फिस्टुला में अंतर समझते हैं। आचार्य बालकृष्ण के मुताबिक पाइल्स को आयुर्वेद में ‘अर्श’ कहा गया है। यह तीन दोषों – वात, पित्त और कफ के दूषित होने के कारण होता है। इसलिए इसे त्रिदोषज रोग भी कहा जाता है। जिन बवासीर में वात या कफ प्रधान होता है, वे सूखे होते हैं। इसलिए मांसल कोशिकाओं से कोई स्राव नहीं होता है। अर्श जिसमें रक्त या पित्त या रक्त पित्त प्रधान होता है, वे आर्द्र अर्श होते हैं। इसमें खून बह रहा है। सूखे हुए अर्श में दर्द अधिक होता है। बवासीर होने के कारण (Piles or Hemorrhoids Causes) आचार्य बालकृष्ण के मुताबिक कब्ज भी बवासीर का एक प्रमुख कारण है। कब्ज में मल सूखा और सख्त होता है, जिसके कारण व्यक्ति को मल त्याग करने में कठिनाई होती है। बहुत देर तक स्थिर बैठना पड़ता है। इस कारण वहां की रक्त वाहि...