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प्रेग्नेंसी के दौरान Gestational Diabetes से बचने के लिए रखें इन 3 बातों का ख्याल

Gestational Diabetes Tips: शरीर में जब इंसुलिन हार्मोन की कमी हो जाती है तो लोग डायबिटीज बीमारी से ग्रस्त हो सकते हैं। हेल्थ एक्सपर्ट्स मानते हैं कि खराब जीवन शैली के कारण होने वाली इस बीमारी के तीन प्रमुख प्रकार होते हैं। डायबिटीज टाइप 1, टाइप 2 और जेस्टेशनल डायबिटीज, इस बीमारी में बॉडी में ग्लूकोज की मात्रा बढ़ जाती है। यह एक ऐसा रोग है जिसमें व्यक्ति को काफी परहेज करना पड़ता है और थोड़ी सी भी लापरवाही खतरनाक हो सकती है।

आंकड़ों के मुताबिक गर्भावस्था के दौरान करीब 14 फीसदी महिलाओं में जेस्टेशनल डायबिटीज का खतरा होता है। वहीं, कुछ महिलाओं में प्रेग्नेंसी के बाद भी मधुमेह टाइप 2 का खतरा बरकरार रहता है। एक अध्ययन के अनुसार डायबिटिक महिला या जो महिलाएं गर्भावधि में इस बीमारी से ग्रसित हो जाती हैं, उनके गर्भ में पल रहे शिशु को दिल से संबंधित बीमारियों का खतरा अधिक होता है। ऐसे में जानिये 5 जरूरी बातें जिनका ख्याल प्रेग्नेंट महिलाओं को रखना चाहिए।

फॉलो करें प्रॉपर डाइट: जेस्टेशनल डायबिटीज मैनेजमेंट में डाइट अहम भूमिका निभा सकता है। दिन भर में छोटी-छोटी मील लें, जिसमें 3 बार खाना और तीन बार स्नैक्स शामिल हो। कॉम्प्लेक्स कार्ब्स खाएं, खाने में एक बार में 45 से 50 ग्राम से अधिक कार्ब्स नहीं लें। लो जीआई वैल्यू वाले फूड्स का सेवन करें, फाइबरयुक्त फूड्स डाइट में शामिल करें। ऐडेड शुगर, प्रोसेस्ड और फैटी फूड्स से परहेज करें।

वजन पर रखें नियंत्रण: गर्भावधि मधुमेह के लिए कुछ जोखिम कारकों में मोटापा भी शामिल है। प्रेग्नेंसी के दौरान वजन बढ़ना आम बात है लेकिन अगर आपका वजन बहुत अधिक बढ़ जाता है, तो यह आपके गर्भावधि मधुमेह से ग्रस्त होने के जोखिम को बढ़ा सकता है। ऐसे में वेट कंट्रोल करना आवश्यक होता है।


एक्सरसाइज करें: जेस्टेशनल डायबिटीज में गर्भवती मां इंसुलिन के लिए प्रतिरोधी बन सकती हैं, ऐसा हार्मोनल बदलाव की वजह से होता है। बता दें कि ब्लडस्ट्रीम से बॉडी सेल्स तक ग्लूकोज को पहुंचाने में इंसुलिन का योगदान होता है। ऐसे में नियमित व्यायाम और शारीरिक गतिविधि इंसुलिन प्रतिरोध को कम करने में मदद करती है और शरीर को प्रसव के लिए भी तैयार करती है। एक्सरसाइज करने से सेल्स इंसुलिन सेंसिटिव बनते हैं।

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