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बचपन में गाय का दूध पीने से बढ़ सकता है टाइप-1 डायबिटीज का खतरा? रिसर्च में कही गई ये बात

डायबिटीज एक क्रॉनिक डिसीज है, जिसमें व्यक्ति को अपने खानपान का विशेष रूप से ध्यान रखने की जरूरत होती है। शरीर जब इंसुलिन प्रतिरोधी हो जाता है या फिर पैन्क्रियाज इंसुलिन हार्मोन का उत्पादन नहीं कर पाता तो लोग डायबिटीज की चपेट में आ जाते हैं। लेकिन हाल ही में एक रिसर्च में खुलासा हुआ है कि बचपन में एक से दो गिलास गाय का दूध पीने से, युवावस्था में मधुमेह की बीमारी का खतरा बढ़ जाता है।

यूरोपियन एसोसिएशन फॉर द स्टडी ऑफ डायबिटीज के वार्षिक सम्मेलन में ऑनलाइन प्रस्तुत की गई रिसर्च के अनुसार गाय का दूध टाइप-1 डायिबटीज की खतरे को बढ़ाता है। यह रिसर्च बुधवार को जारी की गई थी। स्वीडन में करोलिंस्का इंस्टीट्यूट के वैज्ञानिकों द्वारा किए गए एक नए अध्ययन में खुलासा हुआ की मां का दूध बच्चों को टाइप-1 डायबिटीज के खतरे से बचा सकता है। लेकिन जो बच्चे दिन में दो से तीन गिलास गाय के दूध का सेवन करते हैं, उनमें टाइप-1 मधुमेह विकसित होने की संभवाना दो गिलास से कम दूध का सेवन करने वालों से 78 प्रतिशत अधिक होती है।

शोधकर्ताओं के मुताबिक सालाना युवाओं में टाइप-1 डायबिटीज का खतरा यूरोप में 3.4 प्रतिशत और यूएस में 1.9 प्रतिशत बढ़ गया है। टाइप -1 डायबिटीज की बीमारी में इम्युन सिस्टम अग्न्याशय में इंसुलिन बनाने वाली कोशिकाओं को नष्ट कर देता है।

रिसर्च में सामने आया कि छह से 12 महीने तक स्तनपान कराने वाले बच्चों में टाइप-1 मधुमेह होने की संभावना 61 फीसदी कम थी। लेकिन गाय के दूध, मक्खन, पनीर, दही और आइसक्रीम जैसे उत्पादों के अधिक सेवन से टाइप -1 मधुमेह का खतरा बढ़ जाता है।

फिनलैंड के हेलसिंकी विश्वविद्यालय के शोधकर्ताओं ने साल 2000 में बताया था कि गाय के दूध के जल्दी संपर्क में आने से उन शिशुओं में टाइप-1 डायबिटीज का जोखिम बढ़ जाता है, जिनके परिवार में पहले से ही यह बीमारी चली आ रही हो।

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