Skip to main content

Blood Sugar: क्या आलू खाने से बढ़ सकता है ब्लड शुगर? जानिये क्या है सच्चाई

आलू खाना हम सभी को पसंद है। आलू हमारे खाने का अहम हिस्सा है, जिसके बिना हमारी थाली का स्वाद अधूरा रहता है। फाइबर, पोटेशियम, विटामिन सी और विटामिन बी 6 जैसे पोषण तत्वों से भरपूर आलू ब्लड में कोलेस्ट्रॉल को कंट्रोल करने में मदद करता है। इसका सेवन करने से दिल की सेहत दुरुस्त रहती है।

इतने गुणों से भरपूर आलू का सेवन शुगर के मरीज़ कर सकते हैं या नहीं यह सवाल अक्सर जहन में आता है। शुगर के मरीज़ अपनी डाइट बेहद सोच समझ कर लेते हैं, वो अपनी डाइट में ऐसी चीज़ों का सेवन करते हैं जिनसे उनके ब्लड में शुगर का स्तर कंट्रोल रहे।

आलू में मौजूद कार्बोहाइड्रेट शुगर को बढ़ा सकता है: आलू हाई ग्लाइसेमिक इंडेक्स में आता है जिसका सेवन शुगर के मरीज़ों को प्रभावित कर सकता है। आलू में कार्बोहाइड्रेट्स की मात्रा अधिक होती है इसलिए अक्सर डायबिटीज के मरीज आलू खाने से परहेज करते हैं। वेबएमडी डॉटकॉम के मुताबिक आलू का सेवन करने से डायबिटीज के मरीज़ों के शरीर में कार्बोहाइड्रेट सिंपल शुगर के रूप में ब्लड में मिल जाता है और सर्कुलेट करते रहता है जिससे ज्यादा समय तक ब्लड शुगर बढ़ जाता है।

अगर ब्लड में शुगर के स्तर के बढ़ने का ध्यान नहीं रखता जाए तो मरीज़ को हार्ट फेलियर, स्ट्रोक, किडनी और आंखों की रोशनी जाने का खतरा हो सकता है। इसीलिए शुगर के मरीज़ों को कार्बोहाइड्रेट से भरपूर आलू का सेवन नहीं करने की सलाह दी जाती है। आलू का सेवन करने से ब्लड में शुगर का स्तर तेजी से बढ़ता है।

आलू का हाई ग्लाइसेमिक इंडेक्ट बढ़ाता है शुगर: ग्लाइसेमिक इंडेक्स आपको बताता है कि कुछ फूड्स का सेवन करने से आपके ब्लड में शुगर का स्तर तेजी से बढ़ सकता है। ग्लाइसेमिक लोड आपको यह जानने में मदद करता है कि यह कितना अधिक होगा। आलू का ग्लाइसेमिक इंडेक्स बाकी फूड्स की तुलना में हाई होता है। डायटीशियन शुगर के मरीज़ों को डाइट में ऐसे फूड्स शामिल करने को कहते हैं जिनका ग्लाइसेमिक इंडेक्स कम हो।

शुगर के मरीज़ अगर आलू का सेवन करना चाहते हैं तो वो आलू को खाने का तरीका बदलें। आलू को पकाकर ठंडा करने के बाद आलू का ग्लाइसेमिक इंडेक्ट 25 से 28 फीसदी तक कम हो सकता है। आलू में नींबू का रस या सिरका मिला देने से भी ये कम हो सकता है।

कितना ग्लासेमिक इंडेक्ट शुगर के मरीज़ों के लिए ज्यादा होता है:
High glycemic index- 20 और उससे अधिक होता है।
Medium glycemic index- 11-19 होता है।
Low glycemic index- 10 और उससे कम होता है।

पके हुए रसेट आलू का GL 33 होता है, जबकि सफेद उबले हुए आलू का GL 25 होता है जो शुगर के मरीज़ों की शुगर को बढ़ा सकता है।

The post Blood Sugar: क्या आलू खाने से बढ़ सकता है ब्लड शुगर? जानिये क्या है सच्चाई appeared first on Jansatta.



from जीवन-शैली – Jansatta https://ift.tt/3KOd2wf

Comments

Popular posts from this blog

Redmi भारत में ला रही है अपनी पहली टीवी, 17 मार्च को होगी लॉन्च

Redmi भारत में अपनी पहली टीवी लॉन्च करने जा रही है, जिसको लेकर कंपनी ने ट्विवटर पर एक ट्वीट करके जानकारी दी है। शाओमी अभी तक भारतीय बाजार में एमआई के टीवी लॉन्च करती रही है। from Jansattaटेक्नोलॉजी – Jansatta https://ift.tt/3kTD1WB

Airtel 398 vs Vi 399 Plan: बेनिफिट्स में है बड़ा अंतर, कीमत में है सिर्फ 1 रुपये का फर्क, जानें कौन सा प्लान है बेस्ट

Airtel Prepaid Plan vs Vi Prepaid Plan: हम आज आपको इस बात की जानकारी देंगे कि Airtel 398 Plan और Vi 399 Plan के बीच कीमत के अलावा बेनिफिट्स में क्या-क्या अंतर है। from Jansattaटेक्नोलॉजी – Jansatta https://ift.tt/39NTnw8

बवासीर और फिस्टुला में अंतर कैसे करें? आचार्य बालकृष्ण से जानिए पाइल्स के रामबाण इलाज

बवासीर में ज्यादा खून बहने से शरीर में खून की कमी हो सकती है। व्यक्ति कमजोर महसूस करने लगता है। लंबे समय तक इस बीमारी के बने रहने और इलाज के अभाव में यह कोलोरेक्टल कैंसर का कारण भी बन सकता है। इसलिए लक्षण दिखते ही बवासीर का इलाज कराएं। आइए आचार्य बालकृष्ण से घरेलू उपचार के साथ बवासीर और फिस्टुला में अंतर समझते हैं। आचार्य बालकृष्ण के मुताबिक पाइल्स को आयुर्वेद में ‘अर्श’ कहा गया है। यह तीन दोषों – वात, पित्त और कफ के दूषित होने के कारण होता है। इसलिए इसे त्रिदोषज रोग भी कहा जाता है। जिन बवासीर में वात या कफ प्रधान होता है, वे सूखे होते हैं। इसलिए मांसल कोशिकाओं से कोई स्राव नहीं होता है। अर्श जिसमें रक्त या पित्त या रक्त पित्त प्रधान होता है, वे आर्द्र अर्श होते हैं। इसमें खून बह रहा है। सूखे हुए अर्श में दर्द अधिक होता है। बवासीर होने के कारण (Piles or Hemorrhoids Causes) आचार्य बालकृष्ण के मुताबिक कब्ज भी बवासीर का एक प्रमुख कारण है। कब्ज में मल सूखा और सख्त होता है, जिसके कारण व्यक्ति को मल त्याग करने में कठिनाई होती है। बहुत देर तक स्थिर बैठना पड़ता है। इस कारण वहां की रक्त वाहि...