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परंपरा भी प्रयोग भी

खांडवी
यह गुजरात का लोकप्रिय नाश्ता है। खमन ढोकला की तरह यह भी बहुत हल्का, स्वादिष्ट और सुपाच्य होता है। इसका स्वाद खट्टा, मीठा, नमकीन होता है। इस तरह यह नमकीन और मिठाई दोनों की जरूरत को पूरा करता है। इसे बनाना कठिन काम नहीं। एक-दो बार अभ्यास कर लें, तो घर में ही दुकान से बेहतर खांडवी बना सकते हैं। यों भी बरसात का मौसम है, इसमें बाहर का बना खाना न ही खाया जाए, तो स्वास्थ्य के लिए बेहतर है।

खांडवी बनाने के लिए एक कप बेसन और दो कप छाछ यानी मट्ठा और एक कप पानी की जरूरत पड़ेगी। इसमें डालने के लिए एक से डेढ़ चम्मच चीनी, जरूरत भर का नमक, चुटकी भर कुटी लाल मिर्च, आधा चुटकी कुटी काली मिर्च और चुटकी भर हल्दी पाउडर की जरूरत पड़ेगी। इसके अलावा इसमें आधा चम्मच बारीक कटी अदरक भी पड़ती है। इससे स्वाद बहुत अच्छा आता है। इसी मात्रा में सामग्री कम या ज्यादा ले सकते हैं।

बेसन में छाछ, पानी, नमक, लाल मिर्च, काली मिर्च पाउडर, हल्दी, चीनी और अदरक डाल कर अच्छी तरह फेटें। गांठ बिल्कुल नहीं रहनी चाहिए। इसके लिए चाहें तो मिक्सर की मदद ले सकते हैं। मिक्सर में चला लेने से गांठ की आशंका दूर हो जाती है और मिश्रण अच्छा तैयार होता है।

अब एक कड़ाही गरम करें। उसमें आधा चम्मच घी चारों तरफ फैला लें, ताकि बेसन का मिश्रण डालते ही चिपके नहीं। अब मिश्रण डालें और मध्यम आंच पर लगातार चलाते हुए पानी सूखने तक पकाएं। लगातार चलाते रहना जरूरी है, नहीं तो गांठ बन सकती है। मिश्रण पक कर ऐसा हो जाना चाहिए कि परात या ट्रे में फैलाएं, तो आसानी से फैल जाए। न बहुत गाढ़ा और न पतला।

अब एक ट्रे या परात में घी की हल्की परत लगा कर उसमें पके हुए बेसन को पतली परत बनाते हुए फैला लें। परत रोटी की मोटाई जितनी ही मोटी होनी चाहिए, क्योंकि हमें इसे काट कर लपेटना है।

अब तड़का पैन में एक चम्मच घी गरम करें। उसमें राई और कढ़ी पत्ते का तड़का तैयार करें। आंच बंद कर दें और फिर इसी तड़के में दो चम्मच पानी और एक चम्मच चीनी डाल कर अच्छी तरह घोल लें। इस तड़के को बेसन की परत के ऊपर फैला दें। कच्चे नारियल को कद्दूकस करें और उसे भी बेसन की परत के ऊपर फैला दें। फिर बेसन के मिश्रण को ठंडा होने दें।

मिश्रण ठंडा हो जाए, तो चाकू से दो इंच की लंबाई में काटें और एक सिरे को पकड़ कर गोल-गोल लपेटते चले जाएं। इसी तरह सारे मिश्रण को काट कर लपेट लें। खांडवी तैयार है। इसें छाछ की खटास भी है, मिठास और नमकीन स्वाद भी है। हल्का तीखापन भी। इसे किसी भी वक्त नाश्ते के रूप में खाया जा सकता है।

केले का हलवा
जिन इलाकों में केले की पैदावार अधिक होती है, वहां केले के अनेक व्यंजन बनते हैं। कच्चे केले के भी और पके केले के भी। केले का हलवा भी उनमें एक है। केले के गुणों से तो आप परिचित हैं। हलवा पके केले का बनता है। दक्षिण भारत में केले का हलवा काफी लोकप्रिय है। वहां के मंदिरों में इसे प्रसाद रूप में भी वितरित किया जाता है।

केले का हलवा बनाना बहुत आसान है। इसका स्वाद निराला होता है, हल्की खटास लिए हुए मीठा। इसे बनाने के लिए सामान्य रूप से पका हुआ केला लेना चाहिए। पिलपिला केला बिल्कुल न हो और न ही सख्त। जैसा केला हम सामान्य तौर पर खाते हैं, वैसा ही होना चाहिए। चार केले ले लें। उनका छिलका उतार कर पतला-पतला काट लें।

अब एक पैन या कड़ाही में एक चम्मच घी गरम करें। उसमें पहले कुछ मेवे, जैसे काजू, किशमिश, अखरोट, बादाम आदि जो पसंद हो, तल लें। तले हुए मेवे को अलग रखें। आंच मध्यम कर दें और उसी कड़ाही में कटे हुए केले डाल दें। ऊपर से दो चम्मच चीनी भी डाल दें, ताकि केले के साथ मिल जाए।

हल्के हाथों से चलाते रहें, ताकि केले के सारे टुकड़े सिंक जाएं। ज्यादा देर नहीं पकाना है। यह भी ध्यान रखना है कि केले पक कर बिल्कुल लेई की तरह न हो जाएं, उनके टुकड़े आधा ही गलने पाएं। ऐसा हो जाए, तो आंच बंद कर दें और तले हुए मेवे तोड़ कर इसमें मिला दें। हलवा तैयार है। इसे अलग बर्तन में निकाल कर रख लें।

अगर आप ज्यादा मीठा पसंद नहीं करते, तो पकाते समय केले के साथ चीनी न डालें। अब एक नान स्टिक पैन गरम करें। उसमें दो चम्मच चीनी डालें। चीनी पिघल कर खदकने लगे तो आंच बंद कर दें। पिघली हुई चीनी को किसी प्लेट या थाली में घी की परत लगा कर फैला दें। ठंडा होने दें। ठंडा होने के बाद चीनी चिक्की की तरह सख्त हो जाएगी। इसे निकाल कर छोटे-छोटे टुकड़ों में तोड़ें और हलवा के ऊपर डाल कर सजाएं।
इस हलवा को आइसक्रीम के साथ गरमागरम परोसें, तो इसका स्वाद और मजेदार हो जाता है।



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