Skip to main content

ब्लड शुगर कंट्रोल करने में मददगार हो सकता है आम का पना, जानिए सेवन करने की विधि

आम पना गर्मियों के सबसे पसंदीदा पेय में से एक है। गर्मियों की छुट्टियों में हर कोई अपना बचपन इस स्वादिष्ट पेय का आनंद लेते हुए बिताया होगा। आम से बना पना न सिर्फ चिलचिलाती गर्मी से बचाता है बल्कि गर्मियों में यह हमारे लिए एक स्फूर्तिदायक पेय की तरह भी काम करता है। हर कोई जानता है कि आम का पना कच्चे आम से तैयार किया जाता है। इसलिए कई जगहों पर इसे कैरी पना के नाम से भी जाना जाता है। गर्मी को मात देने में मदद करता है इसलिए इस पेय का पारंपरिक रूप से गर्मियों में आनंद लिया जाता है।

पना के अलावा कच्चा आम खाने में तो मजेदार होता ही इसके साथ ही सेहत के लिए भी बहुत फायदेमंद होता है। मधुमेह रोगियों के लिए कच्चे आम का सेवन बहुत फायदेमंद हो सकता है। आइए जानते हैं कि कच्चा आम और इसका पना सेहत के लिए कितना फायदेमंद होता है। कच्चा आम शरीर के ग्लाइसेमिक लोड को कम करने में मदद करता है। हालांकि, यह तभी संभव है जब आपके पेय में चीनी नहीं डाली गई हो। बिना चीनी मिलाए कम मात्रा में आम पना पीने से शरीर के रक्त शर्करा के स्तर को कम करने में मदद मिल सकती है।

कच्चे आम और इसकी पत्तियों में एंथिसायनिन नामक टैनिन होता है, जो रक्त शर्करा के स्तर को नियंत्रित करने में मदद कर सकता है। इस प्रकार कच्चा आम मधुमेह को नियंत्रित करने में फायदेमंद हो सकता है। कच्चे आम में विटामिन सी, ए, आयरन और कैल्शियम जैसे पोषक तत्व प्रचुर मात्रा में पाए जाते हैं, जो सेहत के लिए फायदेमंद होते हैं। कच्चा आम हमारी त्वचा और बालों की देखभाल में भी बहुत काम आता है।

आम पना कैसे बनाते हैं?

एक गिलास पना बनाने के लिए पहले 2 कच्चे आम, 2 कप पानी (आम पकाने के लिए) और 1.5 कप चीनी या गुड़ के साथ 1 छोटा चम्मच भुना जीरा पाउडर और 1/4 छोटा चम्मच काली मिर्च पाउडर, 2 चम्मच काला नमक, ठंडा पानी, पुदीने के पत्ते लेकर रख लें।

एक प्रेशर कुकर में आम और पानी डालें और इसे 2 सीटी तक कुक करें। इसके बाद आम को ठंडा होने पर उसका छिलका निकाल लें। इसके गूदे को अलग से निकालकर उसमें चीनी, जीरा पाउडर, काली मिर्च पाउडर और काला नमक अच्छी तरह से मिलाएं। इसके लिए चाहें तो मिक्सर या ब्लेंडर का भी उपयोग कर सकते हैं। मिक्स होने के बाद इसे किसी कांच के कंटेनर में डालें। एक गिलास में 4-5 टेबल स्पून आम पना का कंसन्ट्रेट लें। इसमें ठंडा पानी डालें और अच्छी तरह मिलाकर इस खट्टे-मीठे ड्रिंक का मजा लें।



from Lifestyle News in Hindi (जीवन-शैली):Latest Fashion Trends, Health and Beauty Tips | Jansatta https://ift.tt/rCHxReK

Comments

Popular posts from this blog

Redmi भारत में ला रही है अपनी पहली टीवी, 17 मार्च को होगी लॉन्च

Redmi भारत में अपनी पहली टीवी लॉन्च करने जा रही है, जिसको लेकर कंपनी ने ट्विवटर पर एक ट्वीट करके जानकारी दी है। शाओमी अभी तक भारतीय बाजार में एमआई के टीवी लॉन्च करती रही है। from Jansattaटेक्नोलॉजी – Jansatta https://ift.tt/3kTD1WB

Airtel 398 vs Vi 399 Plan: बेनिफिट्स में है बड़ा अंतर, कीमत में है सिर्फ 1 रुपये का फर्क, जानें कौन सा प्लान है बेस्ट

Airtel Prepaid Plan vs Vi Prepaid Plan: हम आज आपको इस बात की जानकारी देंगे कि Airtel 398 Plan और Vi 399 Plan के बीच कीमत के अलावा बेनिफिट्स में क्या-क्या अंतर है। from Jansattaटेक्नोलॉजी – Jansatta https://ift.tt/39NTnw8

बवासीर और फिस्टुला में अंतर कैसे करें? आचार्य बालकृष्ण से जानिए पाइल्स के रामबाण इलाज

बवासीर में ज्यादा खून बहने से शरीर में खून की कमी हो सकती है। व्यक्ति कमजोर महसूस करने लगता है। लंबे समय तक इस बीमारी के बने रहने और इलाज के अभाव में यह कोलोरेक्टल कैंसर का कारण भी बन सकता है। इसलिए लक्षण दिखते ही बवासीर का इलाज कराएं। आइए आचार्य बालकृष्ण से घरेलू उपचार के साथ बवासीर और फिस्टुला में अंतर समझते हैं। आचार्य बालकृष्ण के मुताबिक पाइल्स को आयुर्वेद में ‘अर्श’ कहा गया है। यह तीन दोषों – वात, पित्त और कफ के दूषित होने के कारण होता है। इसलिए इसे त्रिदोषज रोग भी कहा जाता है। जिन बवासीर में वात या कफ प्रधान होता है, वे सूखे होते हैं। इसलिए मांसल कोशिकाओं से कोई स्राव नहीं होता है। अर्श जिसमें रक्त या पित्त या रक्त पित्त प्रधान होता है, वे आर्द्र अर्श होते हैं। इसमें खून बह रहा है। सूखे हुए अर्श में दर्द अधिक होता है। बवासीर होने के कारण (Piles or Hemorrhoids Causes) आचार्य बालकृष्ण के मुताबिक कब्ज भी बवासीर का एक प्रमुख कारण है। कब्ज में मल सूखा और सख्त होता है, जिसके कारण व्यक्ति को मल त्याग करने में कठिनाई होती है। बहुत देर तक स्थिर बैठना पड़ता है। इस कारण वहां की रक्त वाहि...