Skip to main content

टमाटर खाने से हो सकती है किडनी की समस्या, जानिए कौन से लोग कर सकते हैं इसका सेवन

टमाटर नाश्ता बना रहे हों या लंच, लेकिन डिनर टेबल पर रखी सब्जियों का स्वाद भी टमाटर के बिना अधूरा है। यह न सिर्फ खाने के स्वाद को बढ़ाता है बल्कि कुछ बीमारियों के लिए रामबाण भी है। टमाटर में मौजूद लाइकोपीन फैटी लीवर की बीमारी, सूजन और कई तरह के कैंसर से बचा सकता है। चूंकि लाइकोपीन एक मजबूत एंटीऑक्सिडेंट, एंटी-इंफ्लेमेटरी और कैंसर-रोधी एजेंट है।

इसके अलावा टमाटर में मौजूद लाइकोपीन हृदय रोग, ऑस्टियोपोरोसिस, मधुमेह और फेफड़ों से संबंधित समस्याओं से निजात दिलाने में भी बड़ी भूमिका निभाता है। लेकिन क्या आप जानते हैं कि टमाटर खाने से आपके सेहत को भी नुकसान हो सकता है। जरूरत से ज्यादा टमाटर खाने से सेहत को कई नुकसान हो सकते हैं। इसका किडनी पर काफी ज्यादा असर पड़ता है। जी हां टमाटर का सेवन आपके लिए परेशानी का सबब बन सकता है। आइए जानते हैं इसका सेवन किन लोगों को करना चाहिए और कैसे करना चाहिए-

टमाटर के सेवन से हो सकती है पथरी की समस्या

स्वास्थ्य विशेषज्ञों के अनुसार किडनी में 90 फीसदी लोगों को कैल्शियम ऑक्जलेट पथरी होती है। इसके अलावा जिन लोगों को पहले से ​पथरी की समस्या है, उन्हें खासतौर पर टमाटर के सेवन से परहेज करना चाहिए। स्वास्थ्य विशेषज्ञों के मुताबिक अधिक मात्रा में टमाटर खाने से शरीर में कैल्शियम ऑक्जलेट की मात्रा बढ़ जाती है और वो किडनी में स्टोन का रूप ले लेती है।

टमाटर के सेवन से एसिडिटी की समस्या

टमाटर में अम्ल की मात्रा बहुत ज्यादा होती है। इस वजह से इसके ज्यादा इस्तेमाल से एसिडिटी हो सकती है। इसके अधिक सेवन से सीने में जलन और खट्टी डकारें आने की शिकायत होती है। इसलिए जिन्हें एसिडिटी की समस्या है वे टमाटर के सेवन से बचें।

रोग-प्रतिरोधक क्षमता पर डालता है बुरा असर

टमाटर में साल्मोनेला नाम का बैक्टीरिया होता है जो डायरिया की समस्या को बढ़ाने का काम करता है। इसलिए डायरिया के दौरान अधिक टमाटर खाने से आपकी समस्या बढ़ सकती है। इसके अलावा जानकारों का मानना है कि टमाटर में कुछ ऐसे कैरोटेनॉयड्स होते हैं, जो इम्यून सिस्टम को प्रभावित करते हैं। खासकर कर के कच्चा टमाटर कहने से इम्यून सिस्टम पर बुरा असर पड़ता है।

जोड़ों में बढ़ा सकता है दर्द

बहुत से लोग यूरिक एसिड बढ़ने के कारण जोड़ों के दर्द से पीड़ित होते हैं। स्वास्थ्य विशेषज्ञों के मुताबिक टमाटर के अधिक सेवन की वजह से परेशानी और बढ़ सकती है। क्योंकि टमाटर के अधिक सेवन से जोड़ों में सूजन और जोड़ो में दर्द बढ़ जाता है।

टमाटर का सेवन नियमित मात्रा में ही करना चाहिए

एक्सपर्ट की मानें तो पथरी, जोड़ों में दर्द, दस्त से पीड़ित हैं उन्हें टमाटर के सेवन से परहेज करना चाहिए। इसके अलावा सामान्य व्यक्ति को दिन भर में एक से दो टमाटर का ही सेवन करना चाहिए। टमाटर में मौजूद लाइकोपीन आमतौर पर शरीर के लिए अच्छा होता है लेकिन जब इसका सेवन 75 मिलीग्राम प्रति दिन से अधिक मात्रा में किया जाता है, तो इससे लाइकोपेनोडर्मिया हो सकता है।



from Lifestyle News in Hindi (जीवन-शैली):Latest Fashion Trends, Health and Beauty Tips | Jansatta https://ift.tt/FTNMkhR

Comments

Popular posts from this blog

Redmi भारत में ला रही है अपनी पहली टीवी, 17 मार्च को होगी लॉन्च

Redmi भारत में अपनी पहली टीवी लॉन्च करने जा रही है, जिसको लेकर कंपनी ने ट्विवटर पर एक ट्वीट करके जानकारी दी है। शाओमी अभी तक भारतीय बाजार में एमआई के टीवी लॉन्च करती रही है। from Jansattaटेक्नोलॉजी – Jansatta https://ift.tt/3kTD1WB

Airtel 398 vs Vi 399 Plan: बेनिफिट्स में है बड़ा अंतर, कीमत में है सिर्फ 1 रुपये का फर्क, जानें कौन सा प्लान है बेस्ट

Airtel Prepaid Plan vs Vi Prepaid Plan: हम आज आपको इस बात की जानकारी देंगे कि Airtel 398 Plan और Vi 399 Plan के बीच कीमत के अलावा बेनिफिट्स में क्या-क्या अंतर है। from Jansattaटेक्नोलॉजी – Jansatta https://ift.tt/39NTnw8

बवासीर और फिस्टुला में अंतर कैसे करें? आचार्य बालकृष्ण से जानिए पाइल्स के रामबाण इलाज

बवासीर में ज्यादा खून बहने से शरीर में खून की कमी हो सकती है। व्यक्ति कमजोर महसूस करने लगता है। लंबे समय तक इस बीमारी के बने रहने और इलाज के अभाव में यह कोलोरेक्टल कैंसर का कारण भी बन सकता है। इसलिए लक्षण दिखते ही बवासीर का इलाज कराएं। आइए आचार्य बालकृष्ण से घरेलू उपचार के साथ बवासीर और फिस्टुला में अंतर समझते हैं। आचार्य बालकृष्ण के मुताबिक पाइल्स को आयुर्वेद में ‘अर्श’ कहा गया है। यह तीन दोषों – वात, पित्त और कफ के दूषित होने के कारण होता है। इसलिए इसे त्रिदोषज रोग भी कहा जाता है। जिन बवासीर में वात या कफ प्रधान होता है, वे सूखे होते हैं। इसलिए मांसल कोशिकाओं से कोई स्राव नहीं होता है। अर्श जिसमें रक्त या पित्त या रक्त पित्त प्रधान होता है, वे आर्द्र अर्श होते हैं। इसमें खून बह रहा है। सूखे हुए अर्श में दर्द अधिक होता है। बवासीर होने के कारण (Piles or Hemorrhoids Causes) आचार्य बालकृष्ण के मुताबिक कब्ज भी बवासीर का एक प्रमुख कारण है। कब्ज में मल सूखा और सख्त होता है, जिसके कारण व्यक्ति को मल त्याग करने में कठिनाई होती है। बहुत देर तक स्थिर बैठना पड़ता है। इस कारण वहां की रक्त वाहि...