Skip to main content

इन फल और सब्जियों को खाने से खत्म हो सकती है यूरिक एसिड की समस्या; जानिए डाइट टिप्स

Tips to control uric acid levels: शरीर में यूरिक एसिड बढ़ने की समस्या आज के समय में आम हो गई है। शरीर में प्यूरीन नामक तत्व के टूटने से यूरिक एसिड का स्तर बढ़ने लगता है। इस तरह यह एसिड पेशाब के जरिए शरीर से बाहर निकल जाता है। लेकिन जब शरीर में इसकी मात्रा बढ़ने लगती है तो यह हड्डियों के बीच जमा होने लगती है। जिससे गठिया अलविदा, जोड़ों का दर्द और किडनी की समस्या होने लगती है। ऐसे में यूरिक एसिड के स्तर को नियंत्रित करना बेहद जरूरी है।

आपको बता दें, खाद्य पदार्थों में प्यूरीन तत्व पाया जाता है। यह भोजन के जरिए हमारे शरीर में पहुंचता है और फिर खून के जरिए किडनी तक पहुंचता है। यदि यूरिक एसिड को नियंत्रित करने पर ध्यान न दिया जाए तो यह एक गंभीर समस्या बन जाती है, जो जीवन भर लोगों को परेशान करती है। इससे पैरों में दर्द, जोड़ों का दर्द, टखनों में दर्द और गांठों में सूजन जैसी समस्याएं होती हैं।

ऐसे में यूरिक एसिड को नियंत्रित करने के लिए आप अपने आहार में बदलाव कर सकते हैं। साथ ही पोषक तत्वों से भरपूर चीजों को अपनी डाइट में शामिल करना फायदेमंद हो सकता है।

यूरिक एसिड को कंट्रोल करने के लिए खाएं ये चीजें

यूरिक एसिड को कंट्रोल करने के लिए खाएं ये सब्जियां: हरी पत्तेदार सब्जियां खाना यूरिक एसिड को कंट्रोल करने में काफी फायदेमंद साबित हो सकता है। जैसे पालक, पत्ता गोभी और मटर। इसके अलावा आलू, मशरूम, ब्रोकली और बैगन खाने से भी यूरिक एसिड नॉर्मल रहता है। वहीं सब्जियों में आप दाल, बीन्स, सोयाबीन और टोफू आदि भी खा सकते हैं क्योंकि यह शरीर में बढ़ते यूरिक एसिड को कम करता है। इसके अलावा ओट्स, ब्राउन राइस और जौ से भी यूरिक एसिड को नियंत्रित किया जा सकता है।

लौकी का जूस: यूरिक एसिड को कम करने के लिए लौकी का जूस रामबाण इलाज है। इसका रोजाना सेवन करने से यह धीरे-धीरे कंट्रोल होने लगता है। इसके अलावा गाजर और चुकंदर का जूस भी पीना चाहिए, क्योंकि यह शरीर के पीएच को बढ़ाता है और यूरिक एसिड को कम करता है। रोजाना नारियल पानी पीना भी फायदेमंद साबित होता है।

विटामिन सी से भरपूर चीजें खाएं: यूरिक एसिड को कंट्रोल करने के लिए विटामिन सी से भरपूर चीजों का सेवन करना चाहिए। आंवला और अमरूद की तरह इनमें भी भरपूर मात्रा में विटामिन सी होता है, जो आपके शरीर में विटामिन सी की मात्रा को बढ़ाता है। इसके अलावा एलोवेरा जूस में आंवले का रस मिलाकर पीने से भी यूरिक एसिड कंट्रोल होता है।



from Lifestyle News in Hindi (जीवन-शैली):Latest Fashion Trends, Health and Beauty Tips | Jansatta https://ift.tt/2h1GOXc

Comments

Popular posts from this blog

Redmi भारत में ला रही है अपनी पहली टीवी, 17 मार्च को होगी लॉन्च

Redmi भारत में अपनी पहली टीवी लॉन्च करने जा रही है, जिसको लेकर कंपनी ने ट्विवटर पर एक ट्वीट करके जानकारी दी है। शाओमी अभी तक भारतीय बाजार में एमआई के टीवी लॉन्च करती रही है। from Jansattaटेक्नोलॉजी – Jansatta https://ift.tt/3kTD1WB

Airtel 398 vs Vi 399 Plan: बेनिफिट्स में है बड़ा अंतर, कीमत में है सिर्फ 1 रुपये का फर्क, जानें कौन सा प्लान है बेस्ट

Airtel Prepaid Plan vs Vi Prepaid Plan: हम आज आपको इस बात की जानकारी देंगे कि Airtel 398 Plan और Vi 399 Plan के बीच कीमत के अलावा बेनिफिट्स में क्या-क्या अंतर है। from Jansattaटेक्नोलॉजी – Jansatta https://ift.tt/39NTnw8

बवासीर और फिस्टुला में अंतर कैसे करें? आचार्य बालकृष्ण से जानिए पाइल्स के रामबाण इलाज

बवासीर में ज्यादा खून बहने से शरीर में खून की कमी हो सकती है। व्यक्ति कमजोर महसूस करने लगता है। लंबे समय तक इस बीमारी के बने रहने और इलाज के अभाव में यह कोलोरेक्टल कैंसर का कारण भी बन सकता है। इसलिए लक्षण दिखते ही बवासीर का इलाज कराएं। आइए आचार्य बालकृष्ण से घरेलू उपचार के साथ बवासीर और फिस्टुला में अंतर समझते हैं। आचार्य बालकृष्ण के मुताबिक पाइल्स को आयुर्वेद में ‘अर्श’ कहा गया है। यह तीन दोषों – वात, पित्त और कफ के दूषित होने के कारण होता है। इसलिए इसे त्रिदोषज रोग भी कहा जाता है। जिन बवासीर में वात या कफ प्रधान होता है, वे सूखे होते हैं। इसलिए मांसल कोशिकाओं से कोई स्राव नहीं होता है। अर्श जिसमें रक्त या पित्त या रक्त पित्त प्रधान होता है, वे आर्द्र अर्श होते हैं। इसमें खून बह रहा है। सूखे हुए अर्श में दर्द अधिक होता है। बवासीर होने के कारण (Piles or Hemorrhoids Causes) आचार्य बालकृष्ण के मुताबिक कब्ज भी बवासीर का एक प्रमुख कारण है। कब्ज में मल सूखा और सख्त होता है, जिसके कारण व्यक्ति को मल त्याग करने में कठिनाई होती है। बहुत देर तक स्थिर बैठना पड़ता है। इस कारण वहां की रक्त वाहि...