निराला की ‘बादल राग’ कविता से कौन परिचित नहीं होगा! बादल के माध्यम से नए क्रांति के स्वर फूंकने और किसान की पीड़ा को उन्होंने अद्भुत अमर स्वर दिए हैं। दिनकर ने तो वर्षा को ऋतुओं की रानी कहा है।
from Jansattaदुनिया मेरे आगे – Jansatta https://ift.tt/2KpcezD
from Jansattaदुनिया मेरे आगे – Jansatta https://ift.tt/2KpcezD
Comments
Post a Comment