जब जिंदगी पर बाजारी कलाओं का तानाशाहनुमा कब्जा हो, तो दिमाग सोचना बंद कर देता है। यह आज का सच भी है कि कुछ भी बहुत ज्यादा हो जाना अच्छा नहीं माना जाता है। कुदरत का नियम है, कुल आसक्ति की चरम स्थिति के बाद विरक्ति शुरू होती है।
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