इंजन और डिब्बे समवेत स्वर में दुहरा रहे हैं- चल कलकत्ते छह-छह पैसे, चल कलकत्ते छह-छह पैसे। शोर बढ़ता जाता है। गाड़ी किसी पुल से गुजरते हुए धड़क-धड़क चीखने लगती है।
from Jansattaदुनिया मेरे आगे – Jansatta https://ift.tt/2yySfJd
from Jansattaदुनिया मेरे आगे – Jansatta https://ift.tt/2yySfJd
Comments
Post a Comment