Skip to main content

29 मई को पहलवान दारा सिंह बने थे विश्व चैंपियन, कभी नहीं देखा था हार का मुंह

उन्नीस सौ साठ के दशक में पूरे भारत में फ्री स्टाइल कुश्तियों का बोलबाला था। दारा सिंह का जन्म 19 नवंबर 1928 को पंजाब, अमृतसर के धर्मुचक गांव में हुआ था। दारा सिंह कम उम्र में पढ़ाई छोड़कर खेती में लग गए थे। इसके बाद उन्होंने गैर-पेशेवर कुश्ती भी की और साल 1947 में, दारा अपने चाचा के साथ सिंगापुर चले गए। दारा सिंह का पूरा नाम दीदार सिंह रंधावा था। दारा, अपने जमाने के विश्व प्रसिद्ध फ्रीस्टाइल पहलवान रहे हैं।

सिंगापुर में पहलवान को किया था चारों खाने चित: भारत की आज़ादी के दौरान 1947 में सिंगापुर में ‘भारतीय स्टाइल’ की कुश्ती के मलेशियाई चैंपियन तरलोक सिंह से दारा सिंह का मुकाबला हुआ और इसी कुश्ती में तरलोक को चारों खाने चित करने के बाद से दारा सिंह का विजयी अभियान शुरू हुआ। कई देशों के पहलवानों को चित करने के बाद साल 1952 में भारत वापस लौट आए और सन 1954 में भारतीय कुश्ती चैंपियन (राष्ट्रीय चैंपियन) बने।

500 से ज्यादा पहलवानों को उनके देश में हराया: पाकिस्तान के माजिद अकरा, शाने अली और तारिक अली, जापान के रिकोडोजैन, यूरोपियन चैंपियन बिल रॉबिनसन, इंग्लैंड के चैंपियन पैट्रॉक समेत कई पहलवानों का गुरूर मिट्टी में मिलाने वाले दारा सिंह ने 500 से ज्यादा पहलवानों को हराया था। दारा सिंह की इस जीत में सबसे खास बात ये कि ज्यादातर पहलवानों को दारा सिंह ने उन्हीं के घर में जाकर चित किया था। दारा सिंह की कुश्ती कला को सलाम करने के लिए साल 1966 में रुस्तम-ए-पंजाब और साल 1978 में रुस्तम-ए-हिंद के खिताब से नवाजा गया।

29 मई के दिन बने थे विश्व चैंपियन: साल 1959 में पूर्व विश्व चैंपियन जार्ज गारडियांका को पराजित करके कामनवेल्थ की विश्व चैंपियनशिप जीती थी। 1968 में अमरीका के विश्व चैंपियन लाऊ थेज को पराजित कर फ्रीस्टाइल कुश्ती के विश्व चैंपियन बन गये। 29 मई 1968 को दारा सिंह ने लाऊ थेज को पराजित कर फ्रीस्टाइल कुश्ती के विश्व चैंपियन का ख़िताब अपने नाम करते हुए भारत के सिर पर विश्व विजेता का ताज रख दिया था। उन्होंने पचपन वर्ष की आयु तक पहलवानी की और पाँच सौ मुकाबलों में किसी एक में भी पराजय का मुंह नहीं देखा। साल 1983 में दारा सिंह ने अपने जीवन का अंतिम मुकाबला जीतने के पश्चात कुश्ती से सम्मानपूर्वक संन्यास ले लिया।

फिल्मों से लेकर राज्यसभा का तक सफर: दारा सिंह ने कई फिल्मों में अभिनय के अतिरिक्त निर्देशन व लेखन भी काम किया था। अपने समय की मशहूर अदाकारा मुमताज के साथ हिन्दी की स्टंट फिल्मों में उन्होंने काम करना शुरू किया। उन्हें टीवी धारावाहिक रामायण में हनुमान के अभिनय से अपार लोकप्रियता मिली। उन्होंने अपनी आत्मकथा मूलत: पंजाबी में लिखी थी जो साल 1993 में हिन्दी में भी प्रकाशित हुई। उन्हें अटल बिहारी वाजपेयी की सरकार ने राज्य सभा का सदस्य मनोनीत किया था और अगस्त 2003 से अगस्त 2009 तक पूरे छ: वर्ष राज्य सभा के सांसद भी रहे थे।

एम.ए. पास लड़की से किया विवाह: साल 1937 में दारा सिंह ने बच्चन कौर से शादी, जिससे उनका एक बेटा प्रद्युमन रंधावा है, जो फिलहाल अभिनेता हैं। बाद में दोनों का तलाक हो गया। जब दारा सिंह पहलवानी के क्षेत्र में अपार लोकप्रियता प्राप्त कर चुके थे उन्हीं दिनों उन्होंने अपनी पसंद से दूसरा विवाह 11 मई 1961 को सुरजीत कौर नाम की एक एम.ए. पास लड़की से किया था। इस दंपति के दो बेटे, वीरेंद्र सिंह रंधावा (अभिनेता) और अमरीक सिंह रंधावा (फिल्म निर्माता) और तीन बेटियां, दीपा सिंह, कमल सिंह और लवलेन सिंह हैं। ।

दिल का दौरा पड़ने से हुआ था निधन: 7 जुलाई 2012 को दिल का दौरा पड़ने के बाद दारा सिंह को कोकिलाबेन धीरूभाई अम्बानी अस्पताल मुम्बई में भर्ती कराया गया, लेकिन जब 5 दिनों तक उनकी सेहत में कोई सुधार नहीं हुआ तो उन्हें मुंबई स्थित निवास पर वापस ले आया गया; जहां 12 जुलाई, 2012 को सुबह साढ़े सात बजे उनका निधन हो गया।



from Lifestyle News in Hindi (जीवन-शैली):Latest Fashion Trends, Health and Beauty Tips | Jansatta https://ift.tt/Qe37i1X

Comments

Popular posts from this blog

Redmi भारत में ला रही है अपनी पहली टीवी, 17 मार्च को होगी लॉन्च

Redmi भारत में अपनी पहली टीवी लॉन्च करने जा रही है, जिसको लेकर कंपनी ने ट्विवटर पर एक ट्वीट करके जानकारी दी है। शाओमी अभी तक भारतीय बाजार में एमआई के टीवी लॉन्च करती रही है। from Jansattaटेक्नोलॉजी – Jansatta https://ift.tt/3kTD1WB

Airtel 398 vs Vi 399 Plan: बेनिफिट्स में है बड़ा अंतर, कीमत में है सिर्फ 1 रुपये का फर्क, जानें कौन सा प्लान है बेस्ट

Airtel Prepaid Plan vs Vi Prepaid Plan: हम आज आपको इस बात की जानकारी देंगे कि Airtel 398 Plan और Vi 399 Plan के बीच कीमत के अलावा बेनिफिट्स में क्या-क्या अंतर है। from Jansattaटेक्नोलॉजी – Jansatta https://ift.tt/39NTnw8

बवासीर और फिस्टुला में अंतर कैसे करें? आचार्य बालकृष्ण से जानिए पाइल्स के रामबाण इलाज

बवासीर में ज्यादा खून बहने से शरीर में खून की कमी हो सकती है। व्यक्ति कमजोर महसूस करने लगता है। लंबे समय तक इस बीमारी के बने रहने और इलाज के अभाव में यह कोलोरेक्टल कैंसर का कारण भी बन सकता है। इसलिए लक्षण दिखते ही बवासीर का इलाज कराएं। आइए आचार्य बालकृष्ण से घरेलू उपचार के साथ बवासीर और फिस्टुला में अंतर समझते हैं। आचार्य बालकृष्ण के मुताबिक पाइल्स को आयुर्वेद में ‘अर्श’ कहा गया है। यह तीन दोषों – वात, पित्त और कफ के दूषित होने के कारण होता है। इसलिए इसे त्रिदोषज रोग भी कहा जाता है। जिन बवासीर में वात या कफ प्रधान होता है, वे सूखे होते हैं। इसलिए मांसल कोशिकाओं से कोई स्राव नहीं होता है। अर्श जिसमें रक्त या पित्त या रक्त पित्त प्रधान होता है, वे आर्द्र अर्श होते हैं। इसमें खून बह रहा है। सूखे हुए अर्श में दर्द अधिक होता है। बवासीर होने के कारण (Piles or Hemorrhoids Causes) आचार्य बालकृष्ण के मुताबिक कब्ज भी बवासीर का एक प्रमुख कारण है। कब्ज में मल सूखा और सख्त होता है, जिसके कारण व्यक्ति को मल त्याग करने में कठिनाई होती है। बहुत देर तक स्थिर बैठना पड़ता है। इस कारण वहां की रक्त वाहि...